अरावली में खनन घोटाला : 100 मीटर से ऊँची खानों को कागजों में छोटा दिखाकर हुआ आवंटन

अरावली पर्वतमाला से जुड़ा बड़ा विवाद क्या है?

राजस्थान की अरावली पर्वतमाला में खनन को लेकर एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अरावली क्षेत्र में करीब 10,500 खानों का आवंटन किया गया, जिनमें से लगभग 900 खदानें ऐसी हैं जिनकी वास्तविक गहराई 100 मीटर से अधिक है।
नियमों के अनुसार, 100 मीटर से अधिक ऊँचाई/गहराई वाली खानों का आवंटन प्रतिबंधित है, लेकिन इन खानों को कागजों में लगभग 80 मीटर ऊँचा दिखाकर नियमों को दरकिनार कर दिया गया।

अरावली में खनन घोटाला

खनन विभाग के इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल

कागजों में कम ऊँचाई दिखाने का खेल
खनन विभाग (Mining Department) के कुछ इंजीनियरों पर आरोप है कि उन्होंने:
खानों की वास्तविक ऊँचाई को जानबूझकर कम दर्शाया
Altimeter उपकरण का गलत उपयोग कर माप में हेराफेरी की
कागजी रिकॉर्ड में खानों को नियमों के अनुरूप दिखाया
इस प्रक्रिया के जरिए अवैध खनन को वैध रूप दे दिया गया।

अलवर और रामगढ़ क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित

प्राप्त जानकारी के अनुसार:
लगभग 80 खदानें अलवर और रामगढ़ क्षेत्र के आसपास स्थित हैं।
यह क्षेत्र अरावली का अत्यंत संवेदनशील इको-सिस्टम माना जाता है।
यहां वन्यजीव, जलस्रोत और जैव विविधता पर सीधा असर पड़ा है।

ACB की कार्रवाई: 10 अधिकारियों पर केस

अरावली में खानों की ऊँचाई कम दिखाकर आवंटन देने के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने:
तत्कालीन निदेशक सहित
कुल 10 अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में मामला दर्ज किया
हालांकि, इसके बावजूद अधिकांश खानों के आवंटन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

उदयपुर में दिखी कार्रवाई, बाकी जगह क्यों नहीं?

एक अहम सवाल यह भी है कि:
उदयपुर में इसी तरह के मामले में खनन विभाग के इंजीनियरों पर कार्रवाई हुई
लेकिन अलवर, रामगढ़ और अन्य क्षेत्रों में अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया
यह प्रशासनिक दोहरे मापदंड (Double Standards) को दर्शाता है।

अरावली पर्वतमाला क्या है?

अरावली पर्वतमाला का परिचय

अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला मानी जाती है।
अरावली कहां स्थित है?
गुजरात
राजस्थान
हरियाणा
दिल्ली
अरावली की लंबाई
लगभग 692 किलोमीटर
अरावली की सबसे ऊँची चोटी
गुरु शिखर (Mount Abu, राजस्थान)
ऊँचाई: लगभग 1,722 मीटर

अरावली का ऐतिहासिक अस्तित्व

अरावली पर्वतमाला का निर्माण करीब 150 करोड़ वर्ष पहले हुआ।
यह हिमालय से भी अधिक पुरानी मानी जाती है

अरावली पर्वतमाला का महत्व।

1. पर्यावरण संतुलन
रेगिस्तान को फैलने से रोकती है।
पश्चिमी राजस्थान में हरियाली बनाए रखने में सहायक
2. जल संरक्षण
भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका
नदियों और झीलों का प्राकृतिक स्रोत
3. जैव विविधता
कई दुर्लभ वनस्पतियां और जीव-जंतु
रणथंभौर, सरिस्का जैसे अभयारण्य इसी क्षेत्र से जुड़े हैं।

100 मीटर से कम दिखाकर खनन करने से क्या नुकसान होंगे?

1. पर्यावरणीय नुकसान
पहाड़ों का स्थायी विनाश
मिट्टी का कटाव और भूस्खलन
2. जल संकट
भूजल स्तर तेजी से गिरेगा
कुएं और हैंडपंप सूखेंगे
3. वन्यजीवों पर असर
जानवरों का प्राकृतिक आवास नष्ट
मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ेगा
4. भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान
प्राकृतिक धरोहर खत्म
जलवायु परिवर्तन की गति तेज

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अरावली में अवैध खनन नहीं रोका गया, तो: राजस्थान का बड़ा हिस्सा रेगिस्तान में बदल सकता है।
दिल्ली-NCR की हवा और भी जहरीली हो जाएगी।

पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थल का विस्तार: पूर्वी राजस्थान के लिए बड़ा खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली पर्वतमाला में लगातार हो रहे अवैध और अनियंत्रित खनन का सीधा असर पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थल (थार डेजर्ट) के विस्तार पर पड़ सकता है। अरावली पर्वतमाला प्राकृतिक रूप से एक ग्रीन वॉल (हरित दीवार) का काम करती है, जो मरुस्थल को पूर्व की ओर बढ़ने से रोकती है।

पूर्वी राजस्थान के लिए खनन बड़ा खतरा 

मरुस्थल का विस्तार क्यों खतरनाक है?

पश्चिमी राजस्थान (जैसे जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) में पहले से ही वर्षा अत्यंत कम होती है।
अरावली कमजोर हुई तो रेत और गर्म हवाएं बिना रुकावट पूर्वी राजस्थान की ओर बढ़ेंगी।
इससे अलवर, भरतपुर, दौसा, जयपुर जैसे जिलों में जलवायु संतुलन बिगड़ सकता है।

पूर्वी राजस्थान में बारिश कम होने का खतरा

अरावली पर्वतमाला मानसून की नमी को रोककर पूर्वी राजस्थान में वर्षा कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि अरावली को खनन के जरिए और कमजोर किया गया, तो:
पूर्वी राजस्थान में भी पश्चिमी राजस्थान जैसी कम बारिश होने की आशंका बढ़ेगी।
कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।
कुएं, तालाब और नदियां सूखने की कगार पर पहुंच सकती हैं।

सीधे शब्दों में कहा जाए तो,
जो हालात आज पश्चिमी राजस्थान में हैं, वही भविष्य में पूर्वी राजस्थान में भी देखने को मिल सकते हैं, जो राज्य के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।

अरावली कमजोर हुई तो क्या हो सकता है?

🔸मरुस्थलीकरण (Desertification) तेजी से बढ़ेगा।
🔸खेती योग्य भूमि बंजर होती जाएगी।
🔸पेयजल संकट गंभीर रूप ले सकता है।
🔸तापमान में असामान्य वृद्धि होगी।
🔸मानव जीवन के साथ-साथ वन्यजीवों पर भी संकट गहराएगा।
🔸पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, अरावली का संरक्षण न हुआ तो आने वाले वर्षों में राजस्थान का बड़ा हिस्सा अर्ध-मरुस्थलीय क्षेत्र में बदल सकता है।

अरावली पर्वतमाला का विनाश केवल पहाड़ों का नुकसान नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थल को पूर्वी राजस्थान तक पहुंचाने का रास्ता खोल सकता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा करेगा।

2010 के आसपास अरावली से जुड़ी दो अहम और वास्तविक घटनाएँ

1️⃣ 2009–2011 के दौरान सुप्रीम कोर्ट/सरकारी सख्ती के बावजूद खनन जारी रहा

2009 से 2011 के बीच अरावली क्षेत्र (खासकर राजस्थान–हरियाणा सीमा) में खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा सख्त निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कई जगहों पर:
खनन पूरी तरह बंद होने के बजाय
तकनीकी रिपोर्ट, ऊँचाई माप और कागजी प्रक्रियाओं के जरिए खनन जारी रहा
यहीं से “नियमों के भीतर दिखाकर नियमों को तोड़ने” की प्रवृत्ति मजबूत हुई
इसी दौर में अरावली को लेकर यह साफ हुआ कि
केवल आदेश पर्याप्त नहीं हैं, निगरानी की कमी सबसे बड़ा कारण है।

2️⃣ 2010 में NGT (National Green Tribunal) के गठन के बाद अरावली मामले सामने आने लगे

2010 में National Green Tribunal (NGT) के गठन के बाद अरावली से जुड़े कई मामलों में:
पर्यावरणीय नुकसान को कानूनी रूप से चुनौती दी जाने लगी
खनन की ऊँचाई, क्षेत्रफल और पर्यावरण मंजूरी पर सवाल उठे
कई मामलों में यह सामने आया कि
जमीनी स्थिति और कागजी रिपोर्ट में बड़ा अंतर है
विशेषज्ञों के अनुसार,
NGT बनने के बाद ही अरावली में छिपे नुकसान सार्वजनिक चर्चा में आए।
Note - यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट्स, विशेषज्ञों के आकलन और सार्वजनिक तथ्यों पर आधारित है।

FAQ
Q1. अरावली पर्वतमाला कितनी पुरानी है?
अरावली पर्वतमाला लगभग 150 करोड़ वर्ष पुरानी मानी जाती है।
Q2. अरावली की सबसे ऊँची चोटी कौन सी है?
गुरु शिखर, जो माउंट आबू (राजस्थान) में स्थित है।
Q3. 100 मीटर से अधिक ऊँचाई वाली खानों का आवंटन क्यों प्रतिबंधित है?
क्योंकि इससे पर्यावरण और जल स्रोतों को गंभीर नुकसान होता है।
Q4. अरावली में खनन से सबसे ज्यादा कौन से जिले प्रभावित हैं?
अलवर, रामगढ़, उदयपुर और आसपास के क्षेत्र।

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